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मोतिहारी शराबकांड में बड़ा एक्शन, 4 मौतों के बाद SHO सस्पेंड, चौकीदार पर कार्रवाई, हत्या की FIR
- Repoter 11
- 03 Apr, 2026
बिहार के मोतिहारी में कथित जहरीली शराब पीने से 4 लोगों की मौत हो गई, 15 लोग बीमार हैं और कई की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर SIT जांच शुरू कर दी है।
मोतिहारी आलम की खबर।मोतिहारी: बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद जहरीली शराब का काला धंधा एक बार फिर कई परिवारों की जिंदगी पर भारी पड़ गया है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में सामने आए कथित जहरीली शराब कांड ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 लोग गंभीर हालत में इलाजरत हैं। सबसे भयावह पहलू यह है कि इनमें से कई लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है और कुछ लोगों के सामने अंधेरा छा जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यह घटना सिर्फ एक गांव या एक टोले तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर आसपास के कई इलाकों तक फैल गया है। जैसे-जैसे बीमार लोगों और मौतों की संख्या सामने आ रही है, वैसे-वैसे पूरे जिले में दहशत, गुस्सा और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
मामले की शुरुआत रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव से मानी जा रही है, जहां बुधवार शाम कथित तौर पर शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई। शुरुआत में कुछ लोगों ने इसे सामान्य बीमारी समझा, लेकिन जब उल्टी, पेट दर्द, बेचैनी, धुंधला दिखना और अचानक हालत बिगड़ने जैसे लक्षण एक के बाद एक सामने आने लगे, तब लोगों को अंदाजा हुआ कि मामला बेहद गंभीर है। इसके बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग—तीनों को एक साथ सक्रिय कर दिया। अब यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, कानून व्यवस्था और शराबबंदी नीति की जमीन पर असल स्थिति को उजागर करने वाला बड़ा सवाल बन गया है।
घटना के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, बीमार पड़े लोगों में कई ऐसे हैं, जिन्हें शराब पीने के कुछ ही देर बाद आंखों के सामने अंधेरा छाने, देखने में परेशानी और शरीर में अजीब तरह की कमजोरी महसूस होने लगी। कई पीड़ितों ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि यह सामान्य चक्कर या थकान है, लेकिन थोड़ी ही देर में हालात बिगड़ते चले गए। किसी को उल्टी शुरू हुई, किसी को तेज पेट दर्द हुआ, तो किसी को धुंधला दिखाई देने लगा। यही वे लक्षण हैं, जो कथित जहरीली या मिलावटी शराब के मामलों में अक्सर देखे जाते हैं। इस बार भी जो सबसे डरावनी बात सामने आई, वह यह रही कि 6 से 7 लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
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मौतों का सिलसिला भी बेहद दर्दनाक तरीके से सामने आया। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान परीक्षण मांझी (46) और हीरालाल भगत की मौत हो गई। इससे पहले एक मौत गुरुवार सुबह और दूसरी गुरुवार रात में हुई थी। इन लगातार मौतों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आशंका है कि कथित जहरीली शराब पीने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कई ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जो अभी सामने नहीं आए हैं और निजी तौर पर इलाज करा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर पुलिसिया डर, सामाजिक शर्म और कानूनी उलझनों के कारण लोग ऐसे मामलों में तुरंत सामने नहीं आते, जिससे इलाज में देरी हो जाती है और खतरा और बढ़ जाता है।
इस पूरे मामले में सबसे पहले संदिग्ध संकेत तब मिला, जब तुरकौलिया थाना क्षेत्र के पुलवा घाट निवासी चंदू की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। बताया गया कि उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया और पुलिस या प्रशासन को तत्काल सूचना नहीं दी। उस समय यह साफ नहीं था कि मौत की वजह क्या थी, लेकिन बाद में जब अलग-अलग इलाकों में एक जैसे लक्षणों वाले मरीज सामने आने लगे, तब यह शक गहराया कि मामला जहरीली शराब से जुड़ा हो सकता है। इसके बाद जब रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा निवासी लोहा ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ी और उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी, तब परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गए। इलाज के दौरान यह बात सामने आई कि उन्होंने शराब पी थी। यहीं से पुलिस और प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का आधार मिला।
जैसे ही यह जानकारी पुष्ट होने लगी कि मामला शराब सेवन से जुड़ा हो सकता है, प्रशासनिक तंत्र हरकत में आ गया। पुलिस ने शराब पीने वाले संभावित लोगों की पहचान शुरू की और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश तेज की गई। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट किया गया। इसी बीच कई और बीमार लोगों के नाम सामने आने लगे। जिन लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया, उनमें कुछ की हालत अपेक्षाकृत स्थिर थी, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। फिलहाल कुल 15 लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है, जिनमें से 3 की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है, क्योंकि गांवों और आसपास के क्षेत्रों में अब भी कई लोगों के बीमार होने की आशंका जताई जा रही है।
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पीड़ितों और उनके परिजनों के बयान इस पूरे कांड की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। लक्ष्मीपुर गदरिया के रहने वाले राजेंद्र कुमार, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है, ने बताया कि शराब पीने के तुरंत बाद उन्हें कुछ खास महसूस नहीं हुआ। वह घर लौट आए, लेकिन करीब आधे घंटे बाद देखने में परेशानी शुरू हो गई। धीरे-धीरे सब कुछ धुंधला दिखने लगा और उन्हें लगा जैसे नजर के सामने अजीब रंग छा गया हो। रात बढ़ने के साथ बेचैनी और कमजोरी भी बढ़ी, जिसके बाद हालत बिगड़ती चली गई। इसी तरह इलाजरत लोहा ठाकुर ने भी बताया कि शराब पीने के बाद घर लौटने पर तबीयत अचानक खराब हुई। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि एक ही जगह या एक ही सप्लाई लाइन से शराब कई लोगों तक पहुंची हो सकती है।
एक अन्य बीमार व्यक्ति लड्डू साह की बेटी गौरी कुमारी ने बताया कि उनके पिता मोतिहारी में ठेला चलाते हैं और बुधवार दोपहर घर लौटने के कुछ देर बाद ही उनकी तबीयत खराब होने लगी। पहले बुखार जैसा लगा, फिर उल्टी शुरू हुई और हालत लगातार गिरती गई। अस्पताल में भर्ती रमेश यादव के बेटे ने भी कहा कि उनके पिता शाम को बाहर निकले थे और लौटने के बाद तबीयत बिगड़ने लगी। पूछने पर उन्होंने बताया कि बाहर बैठकर शराब पी थी। इन बयानों से यह साफ संकेत मिलता है कि यह घटना किसी एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित जहरीली शराब का असर कई घरों तक पहुंचा।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज को लेकर भी लगातार तनाव बना हुआ है। सदर अस्पताल और अन्य चिकित्सा केंद्रों में डॉक्टरों की टीमें लगातार मरीजों की निगरानी कर रही हैं। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, कई मरीजों में ऐसे लक्षण पाए गए हैं, जो जहरीले तत्व के शरीर पर गंभीर असर की ओर इशारा करते हैं। कुछ मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर भी किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि कथित जहरीली शराब शरीर के भीतर पहुंचकर आंख, दिमाग, नर्वस सिस्टम और अन्य अंगों को तेजी से प्रभावित करती है। इसलिए प्रशासन और डॉक्टर दोनों लगातार अपील कर रहे हैं कि जिसने भी संदिग्ध शराब का सेवन किया हो, वह बिना डरे तुरंत अस्पताल पहुंचे।
सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, रात से लगातार मरीज पहुंच रहे हैं। कुछ मरीजों में आंखों की रोशनी कम होने के लक्षण भी मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती इलाज और लगातार निगरानी से कुछ मामलों में स्थिति संभाली जा सकती है, लेकिन देर होने पर नुकसान स्थायी भी हो सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले को सामान्य शराब सेवन की घटना नहीं, बल्कि संभावित जहरीले प्रभाव वाले गंभीर जनस्वास्थ्य संकट की तरह देख रहा है।
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घटना के बाद पुलिस ने भी सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में मृतकों के परिजनों की शिकायत पर हत्या का केस दर्ज किया गया है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह साफ संदेश जाता है कि प्रशासन इस घटना को सिर्फ अवैध शराब सेवन का मामला मानकर नहीं छोड़ना चाहता, बल्कि इसे आपराधिक लापरवाही और जानलेवा सप्लाई नेटवर्क के रूप में देख रहा है। जानकारी के अनुसार, तुरकौलिया और रघुनाथपुर थानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नागा राय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। इसके अलावा कई अन्य संदिग्ध लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की कार्रवाई शुरू हुई है। तुरकौलिया थाना के प्रभारी उमाशंकर मांझी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं चौकीदार भरत राय के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर निगरानी और सूचना तंत्र की विफलता पर सवाल उठते हैं। जब शराबबंदी लागू है, तब गांवों और कस्बों तक अवैध शराब की पहुंच कैसे बनी रहती है, यह सवाल हर बड़े हादसे के बाद फिर उठ खड़ा होता है। इस बार भी ग्रामीणों के बीच यही नाराजगी साफ दिखाई दे रही है कि प्रशासनिक दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर शराब का धंधा आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। इस टीम में साइबर डीएसपी और DIU से जुड़े अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। पुलिस अब केवल यह नहीं देख रही कि शराब किसने बेची, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह कथित जहरीली खेप कहां से आई, किस रास्ते से गांवों तक पहुंची, किसने सप्लाई की और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। अलग-अलग टीमों को छापेमारी और पूछताछ के लिए लगाया गया है। कई संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस धंधे में स्थानीय स्तर पर कोई संगठित गिरोह सक्रिय था।
यह पूरा मामला एक बार फिर बिहार की शराबबंदी नीति को बहस के केंद्र में ले आया है। बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इस नीति का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ हिंसा को कम करना, परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर करना, सामाजिक माहौल को स्वस्थ बनाना और अपराध पर लगाम लगाना बताया गया था। कानून के स्तर पर शराब के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है। लेकिन जमीन पर समय-समय पर सामने आने वाले जहरीली शराब के मामले इस नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। समर्थकों का कहना है कि शराबबंदी ने सामाजिक स्तर पर कई सकारात्मक असर डाले हैं, जबकि आलोचकों का तर्क है कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध नेटवर्क सक्रिय हैं और यही नेटवर्क कभी-कभी जानलेवा रूप ले लेते हैं।
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ऐसे मामलों में यह सवाल भी उठता है कि कथित जहरीली या मिलावटी देसी शराब आखिर इतनी खतरनाक क्यों हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध रूप से तैयार की जाने वाली शराब में अक्सर शुद्धता का कोई मानक नहीं होता। कई बार उसमें ऐसे रासायनिक तत्व या जहरीले मिश्रण शामिल हो जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। खासकर मिथाइल अल्कोहल (मेथेनॉल) जैसी जहरीली मिलावट जानलेवा साबित हो सकती है। यह शरीर में पहुंचकर ऐसे विषैले तत्वों में बदल जाती है, जो सबसे पहले आंखों, दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर डालते हैं। यही कारण है कि ऐसे मामलों में लोगों को धुंधला दिखना, रोशनी कम होना, सिर घूमना, उल्टी, तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत और फिर अंगों के काम करना बंद होने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, मेथेनॉल या अन्य जहरीले तत्वों से युक्त शराब का असर कई बार कुछ देर बाद दिखाई देता है। शुरुआत में व्यक्ति सामान्य लग सकता है, लेकिन कुछ घंटों के भीतर उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। आंखों की रोशनी जाना, दिमागी भ्रम, गंभीर एसिडिटी, सांस की समस्या और बेहोशी तक की नौबत आ सकती है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में “इंतजार” सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। समय पर इलाज मिलने पर कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती है, लेकिन देरी होने पर परिणाम घातक हो सकते हैं। मोतिहारी में सामने आए लक्षण भी इसी दिशा में इशारा करते हैं, इसलिए चिकित्सकीय स्तर पर इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
मोतिहारी की यह घटना सिर्फ अपराध या कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गांव-देहात के उस सामाजिक यथार्थ को भी सामने लाती है, जहां शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की उपलब्धता बनी रहती है और कई बार लोग इसकी भयावहता को समझे बिना इसका सेवन कर बैठते हैं। कम कीमत, गुप्त बिक्री और स्थानीय नेटवर्क की वजह से यह धंधा कई जगहों पर जड़ जमाए हुए है। ऐसे में जब भी जहरीली खेप बाजार में पहुंचती है, उसका असर सीधे गरीब और निम्न आय वाले परिवारों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। यही वजह है कि हर ऐसे हादसे के बाद सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता, स्वास्थ्य पहुंच, स्थानीय निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठते हैं।
फिलहाल मोतिहारी में माहौल बेहद तनावपूर्ण है। कई परिवार अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, कुछ घरों में मातम पसरा है और गांवों में डर का माहौल है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह जहरीली शराब किसने बेची, किसने सप्लाई की और किनकी लापरवाही या मिलीभगत से यह जहर लोगों तक पहुंचा। पुलिस जांच, SIT की कार्रवाई और गिरफ्तारियों से कुछ जवाब जरूर सामने आ सकते हैं, लेकिन असली सवाल इससे बड़ा है—क्या इस घटना के बाद भी अवैध शराब का नेटवर्क सचमुच टूटेगा, या कुछ समय बाद फिर किसी और गांव से ऐसी ही खबर आएगी?
मोतिहारी शराबकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जहरीली शराब का एक-एक घूंट सिर्फ नशा नहीं, बल्कि सीधे मौत और अंधेरे की ओर ले जा सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर सबकी नजर पुलिस जांच, अस्पतालों में भर्ती मरीजों की हालत और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ कुछ स्थानीय तस्करों का मामला था या इसके पीछे कहीं ज्यादा बड़ा और संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
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